बेकाबू बस ने चार लोगों को लिया चपेट में, एक की मौत; हादसे के बाद भड़का आक्रोश, बस पर पथराव
तेजाराम साहू इंदौर। मध्यप्रदेश में करीब 21 साल बाद आधुनिक स्वरूप में सार्वजनिक बस सेवा की वापसी के साथ जिस ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ और प्रधानमंत्री ई-बस सेवा को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था के रूप में शुरू किया गया था, उसके शुभारंभ के महज दो दिन बाद ही इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा क्षेत्र में हुए हादसे ने बस संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 25 सितंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत की थी। पहले चरण में इंदौर के लिए 145 बसें शामिल की गई थीं।
रविवार को राजबाड़ा के भीड़भाड़ वाले इलाके में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बस अचानक अनियंत्रित होकर आगे बढ़ गई। सामने आए घटनाक्रम और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार बस ने पहले एक सवारी वाहन को अपनी चपेट में लिया और इसके बाद सड़क पर मौजूद लोगों को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ गई। हादसे में चार लोगों के चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। इनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग घायल हुए हैं। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या को लेकर अंतर है, इसलिए अंतिम आंकड़ा पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
हादसे के बाद राजबाड़ा पर मौजूद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने बस को घेर लिया और उसमें सवार यात्रियों को बाहर निकाला। इसके बाद कुछ लोगों ने बस पर ईंट-पत्थर बरसाना शुरू कर दिया, जिससे बस के शीशे टूट गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने बस को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
बस अचानक क्यों दौड़ी? चालक के बयान से तकनीकी खराबी का सवाल
हादसे के बाद बस चालक से पूछताछ की गई। चालक के अनुसार बस के स्वचालित दरवाजे में पहले से परेशानी थी। उसके मुताबिक रास्ते में दरवाजे में खराबी आने के बाद उसे हाथ से बंद करना पड़ रहा था। राजबाड़ा पहुंचने पर भी दरवाजा हाथ से बंद करने के बाद जैसे ही बस को आगे बढ़ाने की स्थिति में डाला गया, वह अचानक आगे बढ़ गई। चालक का कहना है कि उसने ब्रेक लगाने का प्रयास किया, लेकिन बस नहीं रुकी।
हालांकि पुलिस ने अभी तकनीकी खराबी या ब्रेक में खराबी को हादसे का अंतिम कारण नहीं माना है। बस की यांत्रिक और वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसा केवल तकनीकी खराबी के कारण हुआ या इसके पीछे चालक की लापरवाही अथवा कोई अन्य कारण था। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आएगी।
‘सुरक्षित परिवहन’ की शुरुआत के तुरंत बाद सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत 25 सितंबर को ही हुई थी। शुभारंभ के दौरान आधुनिक बसों में निगरानी कैमरे, आपातकालीन सहायता बटन, स्थान की निगरानी और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की बात कही गई थी। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया था।
लेकिन सेवा शुरू होने के महज दो दिन बाद राजबाड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में बस का अनियंत्रित होकर लोगों को चपेट में लेना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि नई बसों को सड़कों पर उतारने से पहले उनकी तकनीकी जांच, चालक का प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच कितनी गंभीरता से की गई?
राजबाड़ा जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में सड़क पर पैदल चलने वालों और छोटे वाहनों की संख्या काफी रहती है। ऐसे स्थान पर सार्वजनिक परिवहन की बस का अचानक नियंत्रण से बाहर होना गंभीर चिंता का विषय है। अब पुलिस जांच के साथ बस की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है, ताकि यह पता चल सके कि बस में पहले से कोई खराबी थी या नहीं और यदि खराबी थी तो उसे ठीक कराए बिना बस संचालन में क्यों लाई गई।
फिलहाल राजबाड़ा हादसे ने नई शुरू हुई बस सेवा के सामने पहली बड़ी सुरक्षा परीक्षा खड़ी कर दी है। सरकार प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को विस्तार देने और आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन इस हादसे ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि नई बसों के साथ यात्रियों और राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को कितना मजबूत बनाया गया है।
हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार के लिए यह घटना अपूरणीय क्षति है। अब लोगों की नजर पुलिस जांच और बस की तकनीकी जांच रिपोर्ट पर है। इन्हीं जांचों से स्पष्ट होगा कि राजबाड़ा पर कुछ ही सेकंड में हुआ यह दर्दनाक हादसा मानवीय चूक, तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण का परिणाम था।

