तेजाराम साहू खातेगांव। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना के नाम पर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अजनास रोड स्थित दिव्या नर्सिंग होम जांच के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को नोटिस जारी कर इलाज, भर्ती और भुगतान से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं।
दुलवा निवासी रघुनाथ ने आरोप लगाया है कि उसे 1,000 रुपए देने का लालच देकर अस्पताल बुलाया गया। उसके अनुसार, अस्पताल में उसके हाथ पर सलाइन लगी होने का आभास कराते हुए टेप चिपकाई गई और फोटो खींचे गए। कुछ समय बाद उसके मोबाइल पर मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना के तहत 10 हजार रुपए स्वीकृत होने का संदेश आया, जिसके बाद उसे पूरे मामले की जानकारी हुई।
रघुनाथ का दावा है कि वह अकेला नहीं है। उसके मुताबिक कई अन्य लोगों को भी इसी तरह पैसे का लालच देकर अस्पताल बुलाया गया और उन्हें मरीज दर्शाकर योजना के तहत राशि स्वीकृत कराई गई। उसने कुछ स्थानीय लोगों पर भी इस पूरी प्रक्रिया में लोगों को अस्पताल तक लाने का आरोप लगाया है।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शुभम तिवारी ने कहा कि उनके नाम का भी दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल को नोटिस जारी कर सभी संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए हैं।
वहीं, अस्पताल से जुड़े एक प्रतिनिधि ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल का पंजीकरण सितंबर 2024 में डॉ. यशोवर्धन काग के नाम से हुआ था। वर्तमान में उनके भोपाल में पदस्थ होने की जानकारी सामने आई है।
सीएमएचओ कार्यालय का कहना है कि मामले की जांच जारी है। रिकॉर्ड और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जबकि आरोप सही नहीं पाए जाने पर अस्पताल का पक्ष भी दर्ज किया जाएगा।
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन वायरल वीडियो और लगे आरोपों ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना के क्रियान्वयन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
