तेजाराम साहू सीहोर। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्ति पीठ सलकनपुर देवीधाम में एक बार फिर तेंदुए की दस्तक ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार तड़के मंदिर की मुख्य सीढ़ियों पर एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ बेखौफ घूमती हुई सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई। रविवार को वीडियो सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस क्षेत्र में तेंदुआ दिखाई दिया, वहीं 14 मई को एक साधु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, जिसकी जांच में तेंदुए के हमले की आशंका जताई गई थी।
सलकनपुर देवीधाम में हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो जाता है और देर रात तक मंदिर परिसर में लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में मंदिर की मुख्य सीढ़ियों तक तेंदुए और उसके शावकों का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
डेढ़ महीने में तीसरी बार दिखा तेंदुआ
यह कोई पहली घटना नहीं है। 14 जून को भी मंदिर की सीढ़ियों पर तेंदुआ सीसीटीवी में कैद हुआ था। इससे पहले 14 मई को सलकनपुर टेकरी के नागिन जोड़ क्षेत्र में एक साधु का शव मिला था। शुरुआती जांच में जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई गई। इसके बाद वन विभाग ने ट्रैप कैमरे लगाए, जिनमें अगले ही दिन रात करीब 12:30 बजे तेंदुआ कैद हुआ। इसके बाद माना गया कि साधु पर तेंदुए ने हमला किया था।
दर्शन के दौरान हुआ था साधु पर हमला
जानकारी के अनुसार, साधु रोज अपनी झोपड़ी से माता के दर्शन के लिए दंडवत यात्रा करते थे। पहले वे शाम को जाते थे, लेकिन गर्मी बढ़ने के कारण उन्होंने सुबह 4 से 5 बजे के बीच जाना शुरू कर दिया था। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अंधेरे में तेंदुए ने उन्हें किसी वन्य जीव समझकर हमला कर दिया होगा।
पिंजरा लगाने की घोषणा हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं
साधु की मौत के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और विशेष निगरानी की बात कही थी। इसके लिए जिला स्तर पर अनुमति भी मांगी गई थी, लेकिन अब तक पिंजरा नहीं लगाया गया। अब तेंदुए का परिवार दोबारा मंदिर की मुख्य सीढ़ियों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है।
श्रद्धालुओं में दहशत, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
मंदिर परिसर में तेंदुए की लगातार मौजूदगी से श्रद्धालुओं, स्थानीय दुकानदारों और आसपास के लोगों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने, नियमित गश्त कराने और तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू करने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब तेंदुआ लगातार मंदिर परिसर तक पहुंच रहा है, तब श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

