वर्चस्व की लड़ाई में गंभीर घायल हुआ युवराज, 4 घंटे के चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू के बाद वन विहार भोपाल भेजा गया
तेजाराम साहू देवास। जिले के खिवनी अभयारण्य में बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का बड़ा मामला सामने आया है। करीब एक दशक से इलाके पर राज कर रहे 10 वर्षीय अल्फा मेल बाघ 'युवराज' को युवा बाघ 'अधिराज' ने चुनौती देकर उसके क्षेत्र से बेदखल कर दिया। संघर्ष में युवराज के अगले पंजों पर गहरे घाव हो गए, जिससे वह लंगड़ाकर चल रहा था और शिकार करने में भी असमर्थ हो गया।
वन विभाग की गश्ती टीम ने शुक्रवार को युवराज को घायल अवस्था में देखा। इसके बाद शनिवार को वन विहार भोपाल के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया। खिवनी में बाघ को बेहोश करने के लिए हाथी उपलब्ध नहीं होने के कारण टीम को जमीन से ही बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन करना पड़ा।
करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद विशेषज्ञों ने युवराज को सुरक्षित बेहोश किया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए वन विहार भोपाल भेज दिया गया। वन अधिकारियों के अनुसार, खिवनी अभयारण्य में बिना हाथी के यह अपनी तरह का पहला सफल और बेहद चुनौतीपूर्ण बाघ रेस्क्यू ऑपरेशन माना जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की वर्चस्व की लड़ाई में प्रतिद्वंद्वी के पंजों पर हमला किया जाता है, ताकि वह शिकार करने में अक्षम हो जाए। लगभग 10 वर्ष की आयु के बाद अल्फा मेल बाघ की ताकत कम होने लगती है, जबकि 4 से 5 साल के युवा बाघ उसके क्षेत्र पर कब्जा जमाने की कोशिश करते हैं। इसी क्रम में अधिराज ने युवराज को मात देकर उसके इलाके पर अपना दबदबा बना लिया।
खिवनी अभयारण्य के इतिहास में युवराज का विशेष महत्व रहा है। बाघिन मीरा के साथ उसकी जोड़ी ने अभयारण्य में बाघों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में यहां मौजूद सात बाघों के कुनबे की नींव इसी जोड़ी को माना जाता है।
