ट्विशा डेथ केस: CDR और CCTV फुटेज पर आज अहम सुनवाई, CBI ने तेज की जांच

SANDEEP SAHU
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भोपाल में हाईप्रोफाइल मौत की गुत्थी उलझी, सास और पति पर दहेज मृत्यु का केस दर्ज

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भोपाल। एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब पूरी तरह राष्ट्रीय स्तर का हाईप्रोफाइल केस बन चुका है। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है और मंगलवार को भोपाल जिला अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस बीच सीबीआई की टीम लगातार आरोपी पक्ष से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

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मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। जांच एजेंसी ने शुरुआती जांच में दहेज के लिए अतिरिक्त 20 लाख रुपए मांगने की बात को गंभीर माना है।


कोर्ट में दो अलग-अलग आवेदन


ट्विशा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने अदालत में आवेदन दायर कर कॉल डिटेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना से पहले और बाद की कॉल डिटेल्स से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।


वहीं, आरोपी पक्ष की ओर से गिरिबाला सिंह ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए आवेदन दिया है। माना जा रहा है कि दोनों पक्ष इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के जरिए अपनी-अपनी दलीलों को मजबूत करना चाहते हैं।


सोमवार को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन भोपाल पुलिस समय पर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं कर सकी। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई मंगलवार तक के लिए टाल दी और पुलिस को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए। आज की सुनवाई में अदालत रिकॉर्ड और फुटेज को सुरक्षित रखने को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दे सकती है।


 CBI की एंट्री के बाद जांच तेज


सोमवार को सीबीआई की टीम भोपाल पहुंची और कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज एफआईआर को री-रजिस्टर किया। इसके बाद एजेंसी ने समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु का मामला दर्ज किया।


सोमवार शाम करीब 7:30 बजे सीबीआई और SIT की टीम बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित समर्थ सिंह के घर पहुंची। यहां करीब ढाई घंटे तक पूछताछ चली। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्पॉट वेरिफिकेशन भी कराया। मंगलवार सुबह भी सीबीआई की टीम गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और पूछताछ जारी रखी।


पुलिस को सूचना देने में देरी पर सवाल


मामले का सबसे विवादित पहलू पुलिस को सूचना देने में हुई देरी है। जानकारी के मुताबिक ट्विशा ने 12 मई की रात करीब 10:20 बजे कथित रूप से फांसी लगाई थी, लेकिन एम्स अस्पताल से पुलिस को सूचना 13 मई की सुबह करीब 5 बजे दी गई।


सीबीआई अब यह जांच करेगी कि पुलिस को सूचना देने में इतनी देरी क्यों हुई। इस सिलसिले में अस्पताल के डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ से भी पूछताछ की जाएगी।


ट्विशा के परिजनों का आरोप है कि केस को प्रभावित करने की नीयत से जानबूझकर सूचना देर से दी गई ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सके। परिवार का यह भी आरोप है कि ट्विशा के पति समर्थ सिंह, जो पेशे से क्रिमिनल लॉयर हैं, उन्होंने क्राइम सीन को प्रभावित करने की कोशिश की।


सीबीआई की शुरुआती एफआईआर में भी इस आशंका का उल्लेख किया गया है कि पुलिस को सूचना देने में असामान्य देरी हुई।


बेल्ट को लेकर विवाद और पुलिस का जवाब


मामले में फांसी के लिए इस्तेमाल की गई जिमनास्टिक बेल्ट भी विवाद का विषय बनी हुई है। ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया था कि जांच एजेंसियों को बेल्ट समय पर नहीं सौंपी गई।


हालांकि डीसीपी विकास कुमार शहवाल ने स्पष्ट किया कि बेल्ट को सात दिन पहले ही फॉरेंसिक जांच के लिए सागर लैब भेजा जा चुका था। उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद डॉक्टरों ने बेल्ट का परीक्षण किया था और उसके बाद SIT ने इसे सुरक्षित रखते हुए FSL को सौंप दिया।


सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भी नजर


मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया को संयम बरतना चाहिए और मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने पर चिंता जताई।


सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं।


वहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने उनकी अग्रिम जमानत को चुनौती दी है। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।


हालांकि गिरिबाला सिंह के वकील मृगेंद्र सिंह ने अदालत में कहा कि यह कहना गलत है कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।


12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार


24 मई को भोपाल एम्स में दिल्ली एम्स की विशेषज्ञ टीम ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।


12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष लगातार इसे हत्या करार दे रहा है।


अब पूरे मामले की दिशा काफी हद तक सीबीआई जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज पर निर्भर करेगी। भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस केस पर हर किसी की नजर बनी हुई है।


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