सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य एक्शन, होर्मुज के पास मिसाइल साइट और बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स पर हमला

SANDEEP SAHU
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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर क्षेत्रीय माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर वार्ता के दौरान मंगलवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी गतिविधियों को निशाना बनाते हुए हमला किया। इस कार्रवाई में बारूदी सुरंगें बिछा रही बोट्स और बंदर अब्बास पोर्ट के नजदीक मौजूद सरफेस टू एयर मिसाइल साइट को टारगेट बनाया गया।


अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला “सेल्फ-डिफेंस” यानी आत्मरक्षा के तहत किया गया। सेंटकॉम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ईरान की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा बन रही थीं।


उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। यदि यहां बारूदी सुरंगें बिछाई जातीं तो अंतरराष्ट्रीय जहाजों, तेल टैंकरों और अमेरिकी नौसेना के जहाजों को गंभीर खतरा हो सकता था।


हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि अमेरिका अभी भी संयम बरत रहा है और वह किसी बड़े युद्ध की स्थिति नहीं चाहता। अमेरिका का कहना है कि सीजफायर वार्ता को जारी रखना उसकी प्राथमिकता है, लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


उधर ईरान ने अमेरिकी हमले को उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक तेहरान ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है जबकि वार्ता प्रक्रिया जारी है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना चाहता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य कार्रवाई से दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ सकता है। हालांकि अभी तक दोनों पक्षों ने बातचीत पूरी तरह खत्म करने के संकेत नहीं दिए हैं। कतर की राजधानी दोहा में जारी अप्रत्यक्ष वार्ता अभी भी जारी है और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है।


 पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट


1. ट्रम्प बोले- ओबामा जैसी डील नहीं करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कहा कि वे ईरान के साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह कोई “कमजोर समझौता” नहीं करेंगे। ट्रम्प ने कहा कि या तो अमेरिका को मजबूत और सुरक्षित समझौता मिलेगा या फिर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने ईरान पर परमाणु गतिविधियां रोकने का दबाव भी बढ़ाया।

2. दोहा वार्ता में होर्मुज और यूरेनियम सबसे बड़ा मुद्दा

कतर में चल रही वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और ईरान के हाईली एनरिच्ड यूरेनियम कार्यक्रम पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे, जबकि ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है।

3. अमेरिका-ईरान समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं

कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच रविवार तक सीजफायर बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर समझौता हो सकता है, लेकिन अब तक किसी औपचारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। इससे वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

4. सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना फैसला नहीं

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने साफ कहा है कि देश में कोई भी बड़ा रणनीतिक फैसला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। इससे साफ संकेत मिला है कि अंतिम निर्णय का अधिकार अब भी ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व के पास है।

5. हिजबुल्लाह को फिर ईरान का समर्थन

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान और हिजबुल्लाह के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ईरान, इजराइल के खिलाफ लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ मजबूती से खड़ा है। इस बयान के बाद इजराइल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि वार्ता सफल होती है तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, लेकिन किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात फिर विस्फोटक बन सकते हैं।


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