राजस्थान के कुएं से बुझ रही मध्यप्रदेश के गांव की प्यास

SANDEEP SAHU
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45 डिग्री की भीषण गर्मी में महिलाएं और बच्चे ढो रहे पानी, दो साल बाद भी नलों में नहीं आई एक बूंद

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राजगढ़। फतेहपुर गांव में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव के लोगों को पीने का पानी लाने के लिए रोजाना Rajasthan की सीमा तक जाना पड़ रहा है। 45 डिग्री तापमान में महिलाएं सिर पर मटके रखकर और बच्चे ड्रम व बाल्टियां उठाकर आधा किलोमीटर दूर कुएं से पानी ढो रहे हैं।


गांव में नल लगे हैं, पाइप लाइन भी बिछी हुई है, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी घरों के नलों में एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। “हर घर नल से जल” के सरकारी दावों के बीच फतेहपुर गांव की तस्वीरें व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयान कर रही हैं।


तीन हैंडपंप बंद, कुएं का पानी भी खराब


राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित फतेहपुर गांव ग्राम पंचायत बावड़ीखेड़ा के अंतर्गत आता है। करीब 25 घरों और लगभग 200 की आबादी वाले इस गांव में पानी की समस्या वर्षों से बनी हुई है।


गांव में मौजूद तीनों हैंडपंप खराब पड़े हैं। गांव का पुराना कुआं भी अब पीने योग्य नहीं बचा है। ऐसे में ग्रामीणों के पास राजस्थान के झालावाड़ जिले की सीमा पर स्थित कुएं से पानी लाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।


नल लगे, पाइप बिछे, लेकिन पानी नहीं आया


करीब दो वर्ष पहले गांव में नल-जल योजना के तहत पाइप लाइन डाली गई थी। घरों के बाहर नल भी लगाए गए। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब पानी की परेशानी खत्म हो जाएगी, लेकिन योजना अधूरी ही रह गई।


गांव के बीच लगे सूखे नल और जगह-जगह जमीन से बाहर निकली पाइप लाइनें अब सरकारी योजनाओं की विफलता की गवाही दे रही हैं।


ग्रामीण कालू सिंह बताते हैं, “नल तो लगा दिए, लेकिन पाइप सही तरीके से जोड़े ही नहीं गए। जब पाइप लाइन पूरी नहीं हुई तो पानी आएगा कैसे? दो साल से सिर्फ इंतजार कर रहे हैं।”


 पानी के लिए बैलगाड़ी और मटकों का सहारा


गांव में दैनिक जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष पानी बन चुका है। ग्रामीण गजराज सिंह गुर्जर बैलगाड़ी पर खाली ड्रम रखकर राजस्थान के कुएं से पानी भरने जाते हैं।


वे बताते हैं, “महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे तक पानी लाने जाते हैं। सुबह उठते ही सबसे पहले पानी का इंतजाम करना पड़ता है, उसके बाद ही खेत या मजदूरी पर जा पाते हैं।”


गांव की महिलाएं सिर पर मटके रखकर तपती दोपहर में भी पानी लाने को मजबूर हैं। कई बार एक दिन में दो-दो चक्कर लगाने पड़ते हैं, क्योंकि घर में पानी जल्दी खत्म हो जाता है।


बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर


ग्रामीणों का कहना है कि पानी के संकट का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई बच्चे रोजाना पानी भरने में परिवार का हाथ बंटाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।


गजराज सिंह कहते हैं, “यहां सुबह का मतलब पानी भरना है। दिन का बड़ा हिस्सा इसी में निकल जाता है। बच्चों को स्कूल और पढ़ाई से ज्यादा पानी की चिंता करनी पड़ती है।”


हर गर्मी में और गंभीर हो जाते हैं हालात


मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बसे इस गांव में गर्मी बढ़ते ही संकट और गहरा जाता है। राजस्थान वाले कुएं पर भीड़ बढ़ने से घंटों इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल अधिकारी आते हैं, आश्वासन देते हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला।


गांव के लोगों का कहना है कि यदि नल-जल योजना सही तरीके से पूरी कर दी जाए और खराब हैंडपंप सुधार दिए जाएं, तो उन्हें रोज पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।


फिलहाल फतेहपुर गांव में हालात यह हैं कि भीषण गर्मी के बीच लोगों की जिंदगी पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष में गुजर रही है।


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