मंदसौर में RTE प्रवेश को लेकर बच्चों का प्रदर्शन, 40 डिग्री की गर्मी में कलेक्टर कार्यालय के बाहर छाता लेकर बैठे मासूम

SANDEEP SAHU
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निजी स्कूल पर प्रवेश न देने का आरोप

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मंदसौर। शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना के तहत चयन होने के बावजूद निजी स्कूल में प्रवेश नहीं मिलने से नाराज मासूम बच्चों और उनके अभिभावकों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। तेज गर्मी और करीब 40 डिग्री तापमान के बीच बच्चे अपने माता-पिता के साथ छाता लेकर धरने पर बैठे रहे।

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प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर भी शामिल हुए। पालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाया है।


लॉटरी में नाम आने के बाद भी नहीं मिला एडमिशन


प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए आरटीई की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में उनके बच्चों का चयन St. Thomas School की नर्सरी कक्षा के लिए हुआ था।


पालकों के मोबाइल पर 15 अप्रैल 2026 तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने का मैसेज भी आया था। इसके बाद जब वे जरूरी दस्तावेजों के साथ बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे, तो स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया।


अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने साफ कह दिया कि उनके यहां इस प्रकार के आरटीई प्रवेश नहीं दिए जाते। बाद में पालकों को एक और संदेश मिला, जिसमें कहा गया कि निर्धारित समय तक प्रवेश नहीं लेने के कारण उनका आवंटन निरस्त माना जाएगा।


“कई जगह शिकायत की, फिर भी नहीं मिला न्याय”


धरने पर बैठे पालकों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर कई बार कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इसके अलावा जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।


अभिभावकों ने कहा कि वे स्थानीय विधायक, सांसद Sudhir Gupta और उपमुख्यमंत्री Jagdish Devda से भी मिल चुके हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर अब भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।


 गर्मी में मासूमों का प्रदर्शन बना चर्चा का विषय


कड़ी धूप में छोटे-छोटे बच्चों का कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठना शहर में चर्चा का विषय बना रहा। प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना था कि वे मजबूरी में बच्चों को लेकर धरने पर बैठे हैं, क्योंकि शिक्षा का अधिकार मिलने के बावजूद उनके बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया जा रहा।


पालकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर बच्चों को नियमानुसार प्रवेश दिलाया जाए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


क्या है RTE योजना?


Right to Education कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। इसके लिए सरकार ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के जरिए चयन करती है। चयन होने के बाद संबंधित स्कूलों के लिए प्रवेश देना अनिवार्य होता है।


अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और प्रदर्शन कर रहे बच्चों को कब तक न्याय मिल पाता है।


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