किसानों का दावा है कि खरीदी गई उपज का कुल मूल्य लगभग 5 करोड़ रुपये है। किसानों ने व्यापारी पर भरोसा कर अपनी फसल बेच दी थी, लेकिन तय समय पर भुगतान नहीं मिलने पर जब वे उमंग ट्रेडर्स के प्रतिष्ठान पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। इसके बाद व्यापारी और उसके परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। भुगतान नहीं मिलने से परेशान किसानों ने अहमदपुर थाने पहुंचकर सामूहिक शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी उपज इस उम्मीद से बेची थी कि समय पर भुगतान मिलेगा, जिससे वे खेती-किसानी और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकें। लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति संकट में आ गई है। मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। किसानों का आरोप है कि संबंधित व्यापारी का लाइसेंस वर्षों पहले निरस्त हो चुका था, ऐसे में कृषि उपज मंडी प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि व्यापारी का लाइसेंस निरस्त था तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। साथ ही इतनी बड़ी मात्रा में खरीदी होने के बावजूद मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी कैसे नहीं मिली। किसानों ने आशंका जताई है कि या तो अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई। पीडि़त किसानों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और कृषि उपज मंडी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत की कमाई दांव पर लगी हुई है और जल्द से जल्द उनका भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। फिलहाल पुलिस ने किसानों की शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यापारी द्वारा कितनी राशि का भुगतान लंबित है और मामले में किन-किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।
इस घटना ने क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने उचित निगरानी और कार्रवाई की होती तो इतनी बड़ी संख्या में किसानों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
एसडीओंपी पूजा शर्मा
