पहले बताया गया दवा का ओवरडोज, अब पीएम रिपोर्ट में सामने आई दिल की धड़कन रुकने की बात
उमरिया/भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में महिला का शिकार करने वाले बाघ की मौत को लेकर अब नए सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग की शुरुआती जानकारी में बाघ की मौत का कारण ट्रेंकुलाइजेशन दवा का ओवरडोज बताया गया था, लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह शारीरिक कमजोरी और हृदय गति रुकना सामने आई है।
यह मामला 24 मई का है, जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खेरवाटोला गांव में एक बाघ ने महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने बाघ को पकड़ने के लिए ट्रेंकुलाइजेशन ऑपरेशन चलाया था। इसी दौरान बाघ की मौत हो गई थी।
पीएम रिपोर्ट ने बदली तस्वीर
मध्यप्रदेश की पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समीता राजौरा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ के कई दिनों से भूखे होने के संकेत मिले हैं। उसका पाचन तंत्र पूरी तरह खाली था और शरीर की मांसपेशियां भी सूख चुकी थीं।
उन्होंने कहा कि ट्रेंकुलाइजेशन डार्ट लगने के बाद जब बाघ को बाहर निकाला गया तो उसके शरीर से खून नहीं निकला। इससे यह संकेत मिलता है कि उसकी हृदय गति पहले ही रुक चुकी थी और शरीर में रक्त संचार बंद हो चुका था।
शुरुआती दावे और नई रिपोर्ट में विरोधाभास
बाघ की मौत के तुरंत बाद अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान दवा का ओवरडोज हो जाने से उसकी जान गई। लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने वन विभाग के शुरुआती दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाघ पहले से ही अत्यधिक कमजोर और भूखा था, तो ट्रेंकुलाइजेशन प्रक्रिया उसके लिए घातक साबित हो सकती है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौत केवल शारीरिक कमजोरी से हुई या दवा ने भी स्थिति को गंभीर बनाया।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बाघ को ट्रेंकुलाइज करने से पहले उसकी शारीरिक स्थिति का आकलन बेहद जरूरी होता है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई इस घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को सामने ला दिया है। फिलहाल विभाग मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।
