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सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान क्यों लिया
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि 18 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में जांच की निष्पक्षता और संस्थागत पूर्वाग्रह को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतका का पति पेशे से वकील है और उसकी मां पूर्व जिला जज रही हैं, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका जताई गई। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में हस्तक्षेप किया।
राज्य सरकार का आरोप- जांच में अड़चन डाल रहीं सास
ध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह विभिन्न मीडिया चैनलों पर जाकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं।
तुषार मेहता ने कहा कि इस पूरे मामले से एक दुखद संदेश सामने आ रहा है कि समाज में कभी-कभी एक “तलाकशुदा बेटी” को “मृत बेटी” से बेहतर समझा जाता है।
वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई और शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह स्वयं अपने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा रही हैं।
हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई संभव
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई प्रस्तावित है। यह याचिकाएं मध्य प्रदेश शासन और ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई हैं।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को देखते हुए हाईकोर्ट फिलहाल अपना निर्णय टाल सकता है। एडवोकेट पंकज दुबे ने कहा कि हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देशों का इंतजार कर सकता है।
पुलिस रिमांड पर पति समर्थ सिंह
ट्विशा के पति समर्थ सिंह फिलहाल सात दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। पूछताछ के दौरान समर्थ ने बताया कि शादी के शुरुआती दिनों में दोनों के संबंध सामान्य थे, लेकिन प्रेग्नेंसी की पुष्टि के बाद ट्विशा के व्यवहार में बदलाव आने लगा था। उसने दावा किया कि ट्विशा अक्सर ग्लैमर इंडस्ट्री और घरेलू जीवन के बीच तालमेल बैठाने में कठिनाई की बात करती थी।
समर्थ के अनुसार, 12 मई की शाम दोनों ने साथ समय बिताया, वॉक की और भोजन किया। इसके बाद ट्विशा अपने मायके पक्ष से फोन पर बातचीत कर रही थी।
दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने भोपाल एम्स में ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। करीब तीन घंटे चली प्रक्रिया के बाद टीम दिल्ली लौट गई है।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता के अनुसार अंतिम रिपोर्ट आने में अभी समय लगेगा, क्योंकि हिस्टोपैथोलॉजी और विसरा जांच बाकी है।
जांच से जुड़े प्रमुख सवाल
मामले में शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
डबल लिगेचर मार्क पर सवाल
पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ट्विशा के गले पर दो समानांतर निशान पाए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट में कहा गया कि फंदा गर्दन पर दो बार लिपटा हुआ प्रतीत होता है। इसके बावजूद मौत का कारण “सुसाइड बाय हैंगिंग” बताया गया। मायके पक्ष का कहना है कि सामान्य फांसी के मामलों में इस तरह के निशान कम देखे जाते हैं।
फंदे की बरामदगी में देरी
परिजनों का आरोप है कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम के दौरान कथित फंदा न तो डॉक्टरों को सौंपा गया और न ही पुलिस ने तत्काल जब्त किया। बाद में 15 मई को इसे बरामद किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
शरीर पर चोटों के निशान
परिवार का दावा है कि ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बाएं हाथ की कोहनी और कलाई के बीच घावों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चोटें किसी ठोस वस्तु के प्रभाव से हो सकती हैं।
हायॉइड बोन सुरक्षित मिलने पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, फांसी के कई मामलों में हायॉइड बोन प्रभावित हो सकती है। हालांकि पहली रिपोर्ट में यह हिस्सा सुरक्षित बताया गया है। अब दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
फिलहाल इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा बनी हुई है। एक ओर मायके पक्ष हत्या का आरोप लगा रहा है, वहीं ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
