46 प्रांतों के स्थान पर 85 से 90 संभाग बनाने का प्रस्ताव, जिलों की संख्या भी होगी लगभग दोगुनी; मार्च 2027 से लागू हो सकती है नई व्यवस्था
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने बढ़ते कार्यक्षेत्र और संगठनात्मक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्गठन की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत संघ की मौजूदा प्रांत व्यवस्था समाप्त कर संभाग बनाए जा सकते हैं। वहीं, वर्तमान में 922 जिलों की संख्या बढ़ाकर लगभग दोगुनी करने पर भी विचार किया जा रहा है। संगठनात्मक ढांचे में यह बदलाव मार्च 2027 से लागू किए जाने की संभावना है।
इंदौर के डेली कॉलेज में चल रही संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में मंगलवार को इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देशभर से पहुंचे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठन के विस्तार और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव रखे।
11 क्षेत्रों की जगह होंगे 9 क्षेत्र
प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत संघ के मौजूदा 11 क्षेत्रों की संख्या घटाकर नौ करने की योजना है। इसी तरह 46 प्रांतों के स्थान पर 85 से 90 संभाग बनाए जाने पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा प्रदेश प्रचारक और प्रदेश कार्यालय की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
संघ का मानना है कि प्रशासनिक इकाइयों का कार्यक्षेत्र छोटा होने से पदाधिकारियों की जवाबदेही और सक्रियता बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी, निर्णय लेने और उनके क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी। संगठन की योजना गतिविधियों को संभाग, जिला और नगर से आगे बढ़ाकर बस्तियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है।
तीन साल में होगी प्रतिनिधि सभा की बैठक
संघ की बैठकों की अवधि और आयोजन व्यवस्था में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का अधिवेशन हर तीन साल में एक बार आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर बैठकों के आयोजन की आवृत्ति और व्यवस्था में बदलाव की योजना है। बैठक में सामने आए प्रस्तावों के अनुसार क्षेत्रीय स्तर पर साल में दो बार बैठक आयोजित करने पर भी चर्चा हुई।
इन बदलावों का उद्देश्य क्षेत्र, संभाग और राज्य स्तर की इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। हालांकि, संघ की कार्यसमिति की मूल संरचना में बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं जताई गई है।
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन करीब पांच सत्र आयोजित किए गए। इनमें युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर चिंता व्यक्त की गई। इस समस्या से निपटने के लिए सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। संघ का मानना है कि नशामुक्ति के लिए सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
राजनारायण बसु के योगदान का किया स्मरण
बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने राष्ट्र चेतना के अग्रदूत राजनारायण बसु के योगदान को याद किया। उनके द्विशताब्दी वर्ष के संदर्भ में सामाजिक सुधारों में उनकी भूमिका पर चर्चा की गई। सात दिसंबर 1826 को बंगाल में जन्मे बसु ने निर्धनों के उत्थान, नशामुक्ति, महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण कार्य किया था।
4 नवंबर को होगा बैठक का समापन
इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान चल रही गतिविधियों की समीक्षा भी की जा रही है। इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह-सरकार्यवाह सहित अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख तथा संगठन की कार्यकारी संस्था के सदस्य शामिल हैं। बैठक का समापन बुधवार को होगा।
