बाल विवाह एवं बाल शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाव के लिए किया जागरूक
बच्चों को उनके अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण के प्रति जागरूक करना शिविर का मुख्य उद्देश्य
लखन लाल पगारे, खरगोन। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वावधान में प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अखिलेश जोशी के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मंडलेश्वर द्वारा ‘‘जागरूक बचपन सशक्त भारत’’ अभियान के अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल माकड़खेड़ा, तहसील कसरावद में विद्यार्थियों के लिए विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
शिविर में प्रशिक्षु न्यायाधीश मंडलेश्वर सुश्री मुस्कान मंसूरी ने विद्यार्थियों को बच्चों के अधिकारों, शिक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने नालसा की बच्चों की मैत्रीपूर्ण योजना, नालसा शिक्षा योजना, नालसा आशा योजना (बाल विवाह), नशा मुक्ति योजना तथा मानव तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध विधिक सहायता एवं विधिक साक्षरता के बारे में विस्तार से बताया।
सुश्री मंसूरी ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और शिक्षा के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि वे आगे चलकर मजबूत एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकें। बच्चों को जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एवं बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयां बच्चों के सशक्त भविष्य में बाधक हैं। बच्चे किसी भी राष्ट्र का भविष्य और उसकी नींव होते हैं। यदि नींव कमजोर होगी तो इमारत मजबूत नहीं बन सकती। इसलिए बच्चों को इन सामाजिक बुराइयों से दूर रखना आवश्यक है।
शिविर में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के कानूनी प्रावधानों, बालकों के अधिकारों, बाल शोषण से बचाव तथा किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता एवं शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मंडलेश्वर, नालसा की हेल्पलाइन नंबर 15100 एवं चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी बताया गया।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ कानूनी जानकारी रखना भी अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में युवा मोबाइल, रील्स एवं सोशल मीडिया का अधिक उपयोग कर रहे हैं। विद्यार्थियों को तकनीक का सही और सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। इसके दुरुपयोग से मन एवं विचारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है तथा मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ करियर पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल विवाह एवं बाल शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों की रोकथाम करना तथा बच्चों को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य श्री राजेश मालवीय सहित विद्यालय का स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
