ईफ्रूट के दाम 30% तक बढ़े, काजू कतली 1200 रुपए किलो पहुंची; आटा-दाल और बेसन की कीमतों में भी उछाल से बिगड़ा दिवाली का बजट
भोपाल। दिवाली की खुशियों के बीच इस बार महंगाई ने आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। त्योहार पर बनने वाले पकवान हों या रिश्तेदारों को दिए जाने वाले मिठाई और ड्राईफ्रूट के गिफ्ट पैक, हर चीज के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। किराना बाजार में सूखे मेवों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जबकि आटा, बेसन, दाल और चावल जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्री भी महंगी हुई है। इसका सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ा है। काजू कतली की कीमत 1000 रुपए से बढ़कर 1200 रुपए किलो तक पहुंच गई है, वहीं पेड़ा 350 से 450 रुपए किलो बिक रहा है। ऐसे में त्योहार की खरीदारी के लिए लोगों को अपना बजट नए सिरे से तय करना पड़ रहा है।
ड्राईफ्रूट महंगे, मिठाइयों की बढ़ी लागत
सूखे मेवों की कीमतों में तेजी ने मिठाई कारोबार की लागत बढ़ा दी है। काजू, बादाम और पिस्ता महंगे होने से इनसे तैयार होने वाली मिठाइयों के दाम भी बढ़ गए हैं। थोक बाजार से लेकर फुटकर दुकानों तक महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। राजधानी ड्राईफ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर राजपूत के मुताबिक, ड्राईफ्रूट की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसका असर मिठाइयों के साथ दिवाली पर तैयार किए जाने वाले गिफ्ट पैक पर भी पड़ेगा।
इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी बढ़े दाम
महंगाई का असर प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी देखने को मिल रहा है। इंदौर में मिठाई, ड्राईफ्रूट, आटा, बेसन, दाल, चावल और घी तक की कीमतें बढ़ी हैं। पिछले साल 600 रुपए किलो मिलने वाला घी अब 700 रुपए किलो बिक रहा है। बादाम के भाव में भी तेजी दर्ज की गई है।
जबलपुर में चना दाल की कीमत 110 रुपए किलो तक पहुंचने से बेसन 120 से 125 रुपए किलो बिक रहा है। बादाम के दाम 1000 से बढ़कर 1200 रुपए किलो और काजू 900 से बढ़कर 1000 से 1050 रुपए किलो तक पहुंच गया है। किशमिश भी 460 से बढ़कर 500 रुपए किलो हो गई है। आटे की कीमत 25 रुपए से बढ़कर 36 रुपए किलो तक पहुंच गई है।
ग्वालियर में भी खाद्य सामग्री की कीमतों में उछाल आया है। यहां 10 किलो आटे का पैकेट 320 से बढ़कर 390 रुपए हो गया है। मैदा 34 से 36 रुपए और बेसन 80 से 100 रुपए किलो बिक रहा है। बादाम के दाम 1000 से बढ़कर 1300 रुपए किलो और पिस्ता 1400 से बढ़कर 1800 रुपए किलो तक पहुंच गया है।
रोजमर्रा की रसोई का बजट भी बिगड़ा
महंगाई का असर सिर्फ त्योहार पर इस्तेमाल होने वाली खास चीजों तक सीमित नहीं है। आटा, बेसन, दाल और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम भी बढ़े हैं। व्यापारियों के अनुसार कम आवक, परिवहन लागत में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयात महंगा होने से कीमतों पर दबाव बना है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू का कहना है कि पिछले एक महीने में दाल और आटे सहित कई खाद्य सामग्रियों की कीमतों में 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। उड़द और अरहर दाल के भाव में करीब 22 रुपए प्रति किलो तक का अंतर आया है।
खरीदारी का उत्साह बरकरार, लेकिन हर सामान पर नजर
दिवाली पर मिठाई, पकवान और उपहारों की खरीदारी हर परिवार की परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इस बार बढ़ती कीमतों ने त्योहार का खर्च बढ़ा दिया है। इंदौर की गृहिणी साक्षी महेश्वरी और जबलपुर की गायत्री नामदेव के मुताबिक, त्योहार से पहले ही आटा-दाल महंगे होने से घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
बाजारों में खरीदारी को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन ग्राहक अब हर सामान खरीदने से पहले उसकी कीमत का हिसाब लगा रहे हैं। मिठाई से लेकर मेहमाननवाजी तक, हर जरूरत पर महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस बार दिवाली की मिठास के साथ बजट का दबाव भी परिवारों को महसूस हो रहा है।
