मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टरों और एसपी को दिए निर्देश, खाद वितरण से लेकर कम बारिश वाले क्षेत्रों तक की समीक्षा; प्रभावित किसानों को सर्वे के बाद मिलेगी राहत
भोपाल। प्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों को खाद के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने अब जिला प्रशासन को सीधे जवाबदेह बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि खाद की उपलब्धता और वितरण में किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी जिले में खाद की कमी या वितरण को लेकर किसानों को परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टर की होगी।
कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ हुई वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने खाद की मांग, भंडारण और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को जरूरत के समय पर्याप्त खाद मिलना चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि खाद के लिए किसानों को भटकना न पड़े और खेती से जुड़े काम प्रभावित न हों।
कम बारिश वाले इलाकों में सरकार कराएगी सर्वे
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के उन क्षेत्रों की स्थिति पर भी ध्यान दिया, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। ऐसे इलाकों में फसलों पर पड़े संभावित असर का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किन क्षेत्रों में किसान प्रभावित हुए हैं और उन्हें किस स्तर पर सहायता की जरूरत है।
सर्वे के आधार पर तय होगी आर्थिक मदद
सरकार ने कम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देने की तैयारी भी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे पूरा होने के बाद पात्र किसानों की पहचान कर निर्धारित मापदंडों के अनुसार राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। इससे प्रभावित किसानों को आर्थिक संबल देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
खाद वितरण में प्रशासन की होगी सीधी निगरानी
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग को खाद की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने को कहा है। जिलों में खाद की मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच संतुलन बनाए रखने के साथ वितरण व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि खाद की कमी के कारण किसानों को न तो लंबा इंतजार करना पड़े और न ही बुवाई व अन्य कृषि कार्यों में देरी हो।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब खाद वितरण की व्यवस्था जिला प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी बन गई है। खास तौर पर उन जिलों में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जहां खाद की मांग अधिक है या बारिश की कमी के कारण किसानों को अतिरिक्त सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
