कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना बोले- पोर्टल खुलता नहीं, खुलने तक खत्म हो जाती है खाद; किसानों के आक्रोश की जताई आशंका
भोपाल। मध्यप्रदेश में खाद वितरण की व्यवस्था को लेकर अब सरकार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश में खाद की उपलब्धता और वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था पर कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने नाराजगी जताई। कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने व्यवस्था की खामियों को सामने रखते हुए कहा कि किसानों को समय पर जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिला तो स्थिति बिगड़ सकती है। किसान आक्रोशित होकर विरोध पर उतर सकते हैं। उन्होंने समय रहते समस्या का समाधान निकालने की जरूरत बताई। राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, लखन पटेल सहित अन्य मंत्रियों ने भी उनकी बात का समर्थन किया।
मंत्रियों ने कहा कि कम बारिश के कारण किसान जल्द बुवाई करना चाहते हैं, ताकि आगे चलकर फसलों को कम पानी में भी बचाया जा सके। ऐसे में खाद की मांग बढ़ गई है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों से किसानों को खाद नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। मंत्रियों ने ई-टोकन व्यवस्था की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पोर्टल ठीक से काम नहीं करता। कई बार पोर्टल खुलने तक वितरण केंद्रों पर खाद खत्म हो जाती है। किसान टोकन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं।
रबी सीजन की तैयारियों पर भी उठे सवाल
रबी सीजन की बुवाई से पहले खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना कृषि विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन कई मोर्चों पर तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश का रबी सीजन प्लान भी अब तक तैयार नहीं हो पाया है। कैबिनेट में ई-टोकन व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने खाद वितरण की तैयारियों पर भी ध्यान खींचा है।
गांवों में दीपावली मनाएंगे मंत्री और जनप्रतिनिधि
सरकार ने मंत्री, सत्तापक्ष के सांसद और विधायकों को गांवों में दीपावली मनाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलेक्टरों से ऐसे गांवों और क्षेत्रों का चयन करने को कहा गया है, जहां नि:शुल्क रजिस्ट्री से जुड़ा काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। दीपावली के पहले और बाद में इन गांवों में आयोजन किए जाएंगे। इस दौरान हितग्राहियों को रजिस्ट्री की प्रतियां भी सौंपी जाएंगी।
स्वामित्व योजना के लिए दोबारा होगा सर्वे
वर्षों से आबादी की जमीन पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार स्वामित्व योजना के तहत दोबारा सर्वे कराएगी। पात्र हितग्राहियों को दिए जाने वाले अधिकार पत्रकों की नि:शुल्क रजिस्ट्री भी कराई जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद हुई ब्रीफिंग में मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने इसकी जानकारी दी।
वन्यजीव संरक्षण के लिए 17,240 करोड़ रुपए मंजूर
कैबिनेट में प्रदेश के विकास कार्यों के लिए कुल 23,300 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 17,240 करोड़ रुपए जंगलों और उनमें रहने वाले बाघ, तेंदुए, चीते सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के लिए 4,103.73 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 610 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। लोकायुक्त संगठन के लिए 573.85 करोड़ रुपए तथा नगरीय विकास विभाग और अन्य मदों के लिए 700 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
