कहीं नर्मदा की टंकियां नहीं भर रहीं तो कहीं 200 फीट गहरे बोरिंग भी सूखे, नगर निगम ने रेड जोन में रखे प्रभावित इलाके
इंदौर। गर्मी ने अभी दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन इंदौर में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। शहर के 85 वार्डों में से 20 वार्ड ऐसे हैं, जहां पानी की उपलब्धता को लेकर अभी से चिंता बढ़ गई है। कहीं नर्मदा जल की टंकियां निर्धारित स्तर तक नहीं भर पा रही हैं तो कहीं भूजल स्तर गिरने से गहरे बोरिंग भी जवाब देने लगे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने इन वार्डों को रेड जोन में चिह्नित कर जल संकट से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पिछली गर्मियों में इन इलाकों के रहवासियों को अप्रैल और मई के दौरान पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा था। कई कॉलोनियों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने पर लोगों ने प्रदर्शन किए और निगम अधिकारियों के सामने विरोध जताया था। इस बार नगर निगम पिछली गलतियों से सबक लेते हुए गर्मी बढ़ने और संकट गहराने का इंतजार नहीं करना चाहता। इसी के चलते प्रभावित वार्डों के पार्षदों से पानी की मौजूदा उपलब्धता, जरूरत और संभावित समस्याओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति बताते हुए नए बोरिंग कराने, अतिरिक्त हाइड्रेंट बनाने, टैंकरों की संख्या बढ़ाने और नर्मदा जल की टंकियों को कम से कम पांच मीटर तक भरने की मांग की है। उनका कहना है कि नर्मदा की टंकियों में पर्याप्त पानी नहीं होने से सप्लाई के दौरान अंतिम छोर की कॉलोनियों तक जरूरी दबाव नहीं बन पाता। वहीं, नर्मदा पाइपलाइन से वंचित इलाकों में बोरिंग और टैंकर ही पानी के प्रमुख साधन हैं। ऐसे में भूजल स्तर नीचे जाने से इन क्षेत्रों की परेशानी और बढ़ सकती है।
20 वार्डों में जल संकट की आशंका, कई इलाकों में अभी से बिगड़े हालात
नगर निगम ने जिन 20 वार्डों को रेड जोन में शामिल किया है, उनमें वार्ड क्रमांक 16, 18, 26, 30, 31, 33, 37, 43, 44, 45, 51, 54, 55, 64, 70, 75, 77, 79, 82 और 85 शामिल हैं। इन वार्डों के कई हिस्सों में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंची है। यहां रहवासियों की निर्भरता स्थानीय बोरिंग और टैंकरों पर है। भूजल स्तर में गिरावट के कारण पुराने बोरिंग की क्षमता घट रही है, जबकि नए बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं है।
दूसरी ओर, जिन इलाकों में नर्मदा जल की सप्लाई होती है, वहां टंकियों के पूरी क्षमता से नहीं भरने के कारण जल वितरण प्रभावित हो रहा है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की समस्या सामने आने लगी है।
एक हाइड्रेंट के भरोसे पूरा वार्ड, कहीं 108 में से 30 बोरिंग ही चालू
वार्डवार स्थिति देखें तो कई क्षेत्रों में समस्या की गंभीरता साफ नजर आती है। वार्ड क्रमांक 16 पूरी तरह नर्मदा जलापूर्ति से वंचित है। यहां दो हाइड्रेंट में से केवल एक ही चालू स्थिति में रहता है, जबकि दूसरा सूख जाता है। नए बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
वार्ड 37 में नर्मदा-विहीन क्षेत्र अधिक होने से टैंकरों पर दबाव बढ़ जाता है। यहां उपलब्ध टैंकरों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। हाईराइज इमारतों में भी पानी की समस्या बनी हुई है। पिछली गर्मियों में इस वार्ड में जल संकट को लेकर रहवासियों ने प्रदर्शन और हंगामा किया था।
वार्ड 44 की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां करीब 108 बोरिंग हैं, लेकिन पिछली गर्मियों में इनमें से केवल 30 ही चालू रह पाए थे। कई इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई थीं। वहीं, वार्ड 54 की चार कॉलोनियों में पिछले चार महीने से गंदे पानी की शिकायत बनी हुई है। इससे जलापूर्ति की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस बार संकट से पहले तैयारी का दावा, पार्षदों से मांगी जरूरतों की जानकारी
नगर निगम की एमआईसी के सदस्य अभिषेक शर्मा के अनुसार, पिछली गर्मियों में जिन वार्डों से सबसे अधिक जल संकट की शिकायतें मिली थीं, वहां के पार्षदों से मौजूदा हालात और आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली जा रही है। इसका उद्देश्य गर्मी बढ़ने के बाद आनन-फानन में टैंकर और अन्य संसाधन जुटाने के बजाय पहले से ही जरूरी इंतजाम करना है।
नगर निगम के सामने इस बार दोहरी चुनौती है। एक तरफ नर्मदा जलापूर्ति वाले क्षेत्रों में टंकियों को पर्याप्त स्तर तक भरकर नियमित और दबावयुक्त सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ भूजल पर निर्भर इलाकों के लिए बोरिंग, हाइड्रेंट और टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। साथ ही गंदे पानी की शिकायतों का भी समाधान करना जरूरी होगा।
फिलहाल 20 वार्डों को रेड जोन में रखकर निगम ने संभावित जल संकट की गंभीरता स्वीकार कर ली है। अब असली परीक्षा तैयारियों को समय रहते जमीन पर उतारने की होगी। यदि बोरिंग, हाइड्रेंट और टैंकरों की व्यवस्था के साथ नर्मदा जल की टंकियों को भरने की समस्या दूर नहीं हुई तो गर्मी बढ़ने के साथ इन इलाकों में पानी को लेकर फिर विवाद और विरोध की स्थिति बन सकती है।
