मुंबई। शेयर बाजार में गुरुवार को सोने के कारोबार से जुड़ी कंपनी Rajesh Exports के निवेशकों को बड़ा झटका लगा। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत में ही कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
कंपनी का शेयर 104.65 रुपये पर खुला और जल्द ही 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट में फंस गया। इससे पहले शेयर 110.15 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में यह गिरावट सेबी की उस कार्रवाई के बाद आई, जिसमें कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों को कथित रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है।
सेबी ने अपने अंतरिम एकतरफा आदेश में राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से रोक दिया है। नियामक संस्था का आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व (कंसोलिडेटेड रेवेन्यू) को गलत तरीके से दर्शाया। यह राशि संबंधित अवधि में कंपनी द्वारा घोषित कुल समेकित राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत बताई गई है।
सेबी के अनुसार कंपनी ने अपने कुल समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से Valcambi SA, से प्राप्त होने का दावा किया था। हालांकि जांच के दौरान पाया गया कि वैलकैम्बी एसए का वास्तविक स्टैंडअलोन राजस्व कंपनी द्वारा दर्शाए गए समूह राजस्व की तुलना में बेहद कम था।
नियामक के आदेश में कहा गया है कि कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से कई विसंगतियां सामने आई हैं। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने सोने के लेनदेन की सकल राशि को राजस्व के रूप में दर्ज किया, जबकि उसके समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज, ग्राहक विवरण, चालान या उचित लेखांकन आधार उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे कंपनी का राजस्व वास्तविकता से अधिक दिख सकता है और निवेशक गुमराह हो सकते हैं।
राजेश एक्सपोर्ट्स देश की प्रमुख स्वर्ण शोधन (गोल्ड रिफाइनिंग) और आभूषण निर्माण कंपनियों में शामिल है। कंपनी अपने उत्पादों का निर्यात दुनिया के कई देशों में करती है। इसके अलावा भारत में कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री थोक, खुदरा और ‘शुभ ज्वैलर्स’ ब्रांड के तहत संचालित शोरूमों के माध्यम से भी करती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कार्रवाई से कंपनी की साख और निवेशकों के विश्वास पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनी की प्रतिक्रिया, नियामकीय प्रक्रिया और मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर बनी रहेगी। 3 जून तक कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 3,210 करोड़ रुपये था।
