वाशिंगटन। मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण पाने के लिए अमेरिका में एक अनोखी पहल प्रस्तावित की गई है। इस योजना के तहत आने वाले दो वर्षों में लाखों विशेष नर मच्छरों को खुले वातावरण में छोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य मच्छरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी आबादी को नियंत्रित करना है ताकि डेंगू, जीका और अन्य मच्छरजनित रोगों के खतरे को कम किया जा सके।
यह पहल एक प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी के वैज्ञानिक अनुसंधान विभाग द्वारा तैयार की गई है। प्रस्ताव के अनुसार पहले वर्ष में लगभग एक करोड़ साठ लाख और दूसरे वर्ष में भी इतनी ही संख्या में विशेष नर मच्छरों को छोड़ा जाएगा। इस प्रकार कुल तीन करोड़ बीस लाख मच्छरों को नियंत्रित परिस्थितियों में वातावरण में छोड़े जाने की योजना है।
इस योजना का आधार एक प्राकृतिक जीवाणु है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में वोल्बाकिया कहा जाता है। वैज्ञानिक इन नर मच्छरों में इस जीवाणु को स्थापित करते हैं। जब ये नर मच्छर प्राकृतिक वातावरण में मौजूद मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनके द्वारा दिए गए अंडों से नई संतति विकसित नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप समय के साथ मच्छरों की कुल संख्या घटने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल मादा मच्छर ही मनुष्यों को काटती हैं और रोग फैलाती हैं। नर मच्छर न तो काटते हैं और न ही बीमारियां फैलाते हैं। इसलिए इन विशेष नर मच्छरों को छोड़ने से लोगों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा होने की संभावना नहीं मानी जा रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि कीट नियंत्रण की यह पद्धति कोई नई नहीं है। पिछले कई दशकों से विभिन्न हानिकारक कीटों की संख्या कम करने के लिए ऐसी तकनीकों का उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि मच्छरों पर बड़े स्तर पर इस पद्धति को लागू करना चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि मच्छर अत्यंत नाजुक होते हैं और उन्हें बड़ी संख्या में तैयार करना आसान नहीं होता।
अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में विशेष नर मच्छरों का उत्पादन और वितरण संभव हो सका है। इन मच्छरों का उद्देश्य केवल प्राकृतिक मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करना और अगली पीढ़ी के विकास को रोकना है।
फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी द्वारा की जा रही है। अभी यह तय नहीं किया गया है कि मच्छरों को किन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा और यह कार्यक्रम कब शुरू होगा। यदि योजना को मंजूरी मिल जाती है, तो यह मच्छर नियंत्रण के क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े प्रयोगों में से एक माना जाएगा।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयास सफल रहता है तो रासायनिक छिड़काव पर निर्भरता कम हो सकती है और मच्छरों से फैलने वाले रोगों की रोकथाम के लिए एक सुरक्षित तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध हो सकता है। दुनिया भर के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस पहल के परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसकी सफलता भविष्य में कई देशों के लिए नई दिशा तय कर सकती है।
